सोचती हूँ के आज खुद को लिख दूँ
रात का कोई ख्वाब लिख दू
बेबस सी कोई बात लिख दूँ
आज खुद की तकदीर लिख दूँ
आज ज़मी आसमाँँ की भूली बिसरि सी याद लिख दूँ
शामो सुबहो की वो मीठी बात लिख दूँ
आज मैं खुद का अनचाहा सा वो राग लिख दूँ
वो साज लिख दूँ
मेरी बोली की मिठास
मेरी आँखों की चमक
आज मैं कदमो की लम्बी सी कतार लिख दूँ
जो दिल को ख़ुशी दे के ऐसी कोई बात लिख दूँ
ज़िन्दगी की मनचाही सी सौगात लिख दूँ
आज मैं खुद का किरदार लिख दूँ