ज़िंदगी के रंग

ज़रा महसूस करो
ज़िदंगी को
कितनी हसीन हैं
खुशनुमा हैं
कुछ धूप
कुछ छांव सी हैं
कभी हल्की
कभी भारी
आज और कल में ज़िंदगी
प्यारी ज़िंदगी

अनकहे जज़्बात

तुम होती हो तो जीवन में ख़ुशी

हिम्मत और हंसी की महक हैं

जैसे खाने में मसाले की होती होती हैं

तुमसे मसखरी, प्यार से लड़ना झगड़ना सब याद हैं

मेरी सबसे प्यारी यादों में तुम बसी हो

तो मोहब्बत तुमसे भी अगर पैमाना नापा जाये चाहत का तो

वो बचपन के गुड्डे- गुड्डियां

वो सोने चांदी की नदिया

जो बारिश में हमारे अधूरे बने घर की छत पर

छपाछप करते खेला करते थे

आज भी याद हैं

तुमसे मेरा दोस्ताना मुस्कराहट ला देता हैं मेरे चेहरे पर

मेरी छाया तुममे देखा करती हूँ मैं

जब सब हमें हमशक्ल कहा करते हैं

पता नहीं आगे का जीवन किस मोड़ पे ले जाये हमे

कुछ खो के, कुछ पा के

थोड़ा सब्र, थोड़ा साथ निभा के

थोड़ा हंस के, थोड़ा गम में रो के

यूँ मुस्कुरा के, तुम्हे गले से लगा के

कहना हैं तुम सबसे अनमोल हो

तुमसे भी हैं जीवन का कुछ मोल

यूँही साथ देना मेरा उम्र तलक

तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूँ

तुम ही पूरा करती हो मुझे

जीवन को तुम कुछ जीवन बनाती हो

इसकी बगिया को महकाती हो

तुम अनमोल

मेरी प्यारी सी बहना हो

स्वयं को समर्पित

एक कविता खुद के लिए

प्रेम से खुद के मन को स्पर्श करो

देखो के तुम जीवंत हो

तुम ही जीवन

तुम ही मरण

तुम्हारे बाद न कुछ

तुम्हारे साथ ही सब कुछ

तुम्हारी हंसी

अमलतास की बेल सी

महकते गुलाब सी

तुम्हारा होना ज़िन्दगी में

खिलखिलाहट जैसा

सबसे बेहतरीन तोहफा

स्वयं का स्वयं को

तुम ही हो

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