आज मेरे देश में जश्न ए आज़ादी हैं
जवां धड़कनो में आज देश प्रेम की अंगड़ाई हैं
आज शहीदों की शहादत को भरपूर नमन
यादगार यादे हैं, जो आज ही बहुत याद आई हैं
अभी कुछेक को ही याद हैं “भगत सिंह” की विदाई की शहनाई
वो “आज़ाद” की कलाई
वो भूले बिसरे देश के कुछ सौदाई
दंश जिसका हम सदियों तक भुगतेंगे
आज मेरे देश में इक और आज़ादी की सुबह हैं
जिसे जी के महसूस किया जाए वो आज़ादी
मुबारक आप हम बिना बंदिशो के आज़ाद हैं
पर जिसे हम रोज़ जीते हैं, उस आज़ादी को हम रोज़ याद भी रखे
नमन भी जिनकी बदौलत हम रोज़ आज़ाद जीते हैं
आबाद जीते हैं