दोस्ती का लम्बा सफ़र

मेरे अफ़सानो की किताब में इक

तेरी भोली भाली सी सूरत का भी असर हैं

आज के ही दिन नौ साल पहले शुरू हुआ था ये सफ़र

मेरी वो दबी सी आवाज, वो छुपा सा ख्याल

तेरा वो सजग कदमो से आना

कितना निराला सा था

जो आज भी हैं हम दोनों का याराना

तू ख़्वाब सी

मैं हक़ीक़त सी

तू नायाब हैं

मेरे जीवन के एक तोहफे में

तू ही तो खास हैं

कुछ खट्टी मीठी

कुछ रुसवाई सी

रूठने मनाने तक

की सब यादे

मेरे मन के यादगार

तस्वीरों के डब्बे में

सहेज के रखी हैं मैंने

तू और मैं बालो की सफेदी में भी इसे

देखेंगे

किस्से सुनेगे एक दूसरे से, यादो के कुछ हिस्से बनेगे

तेरी “सीमा” नहीं कोई, तू आज़ाद होने को बनी हैं

मैं नदी सी बहने को

उस शीतल धारा को छूने को

ये आगाज़ भी काफी लम्बा हो गया
दोस्ती का हमारा

के कल तक तो ये ख़्वाब था
आज हक़ीक़त कैसे हो गया

तेरी मेरी यादो का हसीं समंदर कैसे हो गया

हंसी की एक लम्बी गूंज

हम दोनों की बातो में गजब ढ़हाती हैं

के आज भी तू बहुत याद आती हैं

तू रहना यही मेरी पलको की छाव तले

खुशी बन के यूंही खिलती रहना

हरदम

मिलती रहना, जीवन के इस सफ़र में साथ चलती रहना

-the poetess

Published by Poetess

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