
बहुत ही याद आ रही हैं
वो ठहाके
हसींं की वो गूंज
कानो में खनखना
रही हैं
प्यारी बहना संग
मस्ती
खाना
कुछ चिढ़ाना
एक दूसरे को
आहा क्या खूब दिन थे वो
यादगार पल थे वो
स्वर्ण मंदिर की नगरी में ही
आनन्द,अद्भुतता हैं
मिट्टी भी कुछ खास हैं
कई वीर जवानों के खून से सींचा गया हैं इसे
तब रंग कुछ सोने जैसा आया होगा
यूँही नहीं इसे तपाया होगा
कुछ खोके ही इसने नाम ये पाया होगा
पर, वहा बीते हर लम्हे की अहमियत
खास हैं
दिलो में ज़िंदा हैं
वो खुश मिज़ाज़
खुशनसीब किस्मत सी
यात्रा
हर यात्रा का अपना एक स्वाद हैं
मन की ताज़गी इसका एहसास हैं
Bhot achii yatra thi 😍
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Hanji, bss thi.
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