कुछ बाते, कुछ यादें

आज फिर चाँद की हल्की हल्की सी झलक

खिड़की से आ रही हैं,

होले होले जैसे चाँद का उजियारा लोरी गा रहा हो,

कुछ सुना रहा हो

रात को रोशन बना रहा हो जैसे ,

कायनात की खूबसूरती बढ़ा रहा हो जैसे,

होले होले से कुछ गुनगुना रहा हो जैसे।

Published by Poetess

Writing is love.

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