कभी किसी पहर मैंं सितारो के बीच चमकती सी दिख जाऊं तो
आश्चर्य न करे,
कई अँधेरी रातों से गुजरा हैं ये सफ़र मेरा
कभी मैं कंचन सी चमक,
महक किसी लता सी पा जाऊं तो
आश्चर्य न करे,
आग की तपन सह के निखारा हैं खुद को
इस रूप में ढाला हैं खुद को

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कभी किसी पहर मैंं सितारो के बीच चमकती सी दिख जाऊं तो
आश्चर्य न करे,
कई अँधेरी रातों से गुजरा हैं ये सफ़र मेरा
कभी मैं कंचन सी चमक,
महक किसी लता सी पा जाऊं तो
आश्चर्य न करे,
आग की तपन सह के निखारा हैं खुद को
इस रूप में ढाला हैं खुद को

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अति सुन्दर पंक्तियां!!
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धन्यवाद, महोदय।
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बहुत बढ़िया
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बहुत खूब 👍🏻👍🏻दुर्गा पूजा की ढेरों शुभकामनाएं 😃🙏
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आपको भी दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं।
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😊🙏🏻🙏🏻
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