दिल ए नवाबी बता
आज रजा क्या
रुसवाई की सजा क्या
खत्म होती ख़्वाहिशों का मजा क्या
ये अधूरापन है ज़िंदगी में
वो इश्कपना भी है
वो दर्द का दवा होना भी
आज ख़्वाहिशों का समंदर
शांत सा है
तूफान में कश्ती
डुबो देने का फनकार ये भी है

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दिल ए नवाबी बता
आज रजा क्या
रुसवाई की सजा क्या
खत्म होती ख़्वाहिशों का मजा क्या
ये अधूरापन है ज़िंदगी में
वो इश्कपना भी है
वो दर्द का दवा होना भी
आज ख़्वाहिशों का समंदर
शांत सा है
तूफान में कश्ती
डुबो देने का फनकार ये भी है

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