कुछ बात करू

के मैं कुछ बात करू

कोई सुने मुझे के ये

मेरे जज्बात कहे

कहानी काफ़ी लम्बी हैं

जुदाई की

बात आती है अब

लौट के आती दुआओं की

बिन मौसम बारिश भी अच्छी नही

हमसे कही हर बात भी अब सच्ची नही

दस्तक अब कोई देता नही

इस दिल पे

मुलाकात भी अब हर किसी से

अच्छी नही

खात्मे की और हैं अब मेरा र्जरा र्जरा

तबियत इतनी खराब भी अब अच्छी नही

Published by Poetess

Writing is love.

2 thoughts on “कुछ बात करू

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