अभी शाम कुछ बाकी हैं
कुछ चाय पे गुफ़्तगू का वो गुमान
वो अंदाज,
वो ख़्वाबों ख़्याल का आना भी बाकी हैं
अभी इस पराये से शहर का
मेरा अपना होना बाकी हैं
के शाम अभी काफ़ी हैं
Writing love

अभी शाम कुछ बाकी हैं
कुछ चाय पे गुफ़्तगू का वो गुमान
वो अंदाज,
वो ख़्वाबों ख़्याल का आना भी बाकी हैं
अभी इस पराये से शहर का
मेरा अपना होना बाकी हैं
के शाम अभी काफ़ी हैं
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