एक कविता खुद के लिए
प्रेम से खुद के मन को स्पर्श करो
देखो के तुम जीवंत हो
तुम ही जीवन
तुम ही मरण
तुम्हारे बाद न कुछ
तुम्हारे साथ ही सब कुछ
तुम्हारी हंसी
अमलतास की बेल सी
महकते गुलाब सी
तुम्हारा होना ज़िन्दगी में
खिलखिलाहट जैसा
सबसे बेहतरीन तोहफा
स्वयं का स्वयं को
तुम ही हो
