शाम कुछ बाकी हैं

अभी शाम कुछ बाकी हैं कुछ चाय पे गुफ़्तगू का वो गुमान वो अंदाज, वो ख़्वाबों ख़्याल का आना भी बाकी हैं अभी इस पराये से शहर का मेरा अपना होना बाकी हैं के शाम अभी काफ़ी हैं

कुछ गीत

कुछ गीत लिखूँ या जज्बात पढूँ इन्हे गाऊ या चुपचाप सुनूँ वास्ता रखू या छोड़ चलू क्या करू क्या ना करू दिल की सुनूँ या मन की करू लब सी लू या बोल पडू खुद को तराशू या कोई और किरदार गढूँ मनमौजी रहू या खुद का इम्तिहान लू तुम बताओ क्या करू क्या नाContinue reading “कुछ गीत”

बिन बात

बिन बात कोई काम नही आता जब चाहें तब कोई साथ नही आता मजबूरी हैं हम सब की एक नही अनेक कोई उनसे पार नही पाता खो देते हैं खुशनुमा लम्हों को हम हरेक से दिल खोल के जिया नही जाता घूट गम का भी सबसे पिया नही जाता जो पी लेता तो वो रंगरेजContinue reading “बिन बात”

कुछ बात करू

के मैं कुछ बात करू कोई सुने मुझे के ये मेरे जज्बात कहे कहानी काफ़ी लम्बी हैं जुदाई की बात आती है अब लौट के आती दुआओं की बिन मौसम बारिश भी अच्छी नही हमसे कही हर बात भी अब सच्ची नही दस्तक अब कोई देता नही इस दिल पे मुलाकात भी अब हर किसीContinue reading “कुछ बात करू”

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