माफ़ी से आजादी तक

मैं सबको माफ करता आया कुछ इस तरह मैं खुद की भलाई करता आया ज़िंदगी बाकी है अभी, जीना भी कुछ बाकी हैं

यादें

यादें दस्तक देती हैं जाडे़ में नरम धूप की तरह ओस की नमी की तरह हल्की सी ठंडक लिए आँखों में बहते नीर सी खुशियों में लम्बी मुस्कान की तरह

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