जाते जाते तुम भूल कर गये हाथ छूटे दिल मिले रह गये
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निरख-परख
शादी में शांति जरूरी है तड़क-भड़क के इतर तभी ये कामयाब है
ओह! सुकून
जिस सुकून की तलाश में हम दर-ब-दर भटकते हैं वो “स्वयं” में विराजमान हैं
दोस्ती
कितना निभाया कितना साथ छोड़ दिया दोस्ती इस आधार पर बनती हैं चलती हैं
उम्र की सीमा
ओह! उम्रदराज दिन और रात बीती हुई बात
मेरा लेखन
मेरे लिए इक आखर लिखना बड़ी बात और मैं कवितायें लिखती हूँ जाने कैसे ये संभव है असंभव सा
सर्द दिन
सर्द दिन ठिठुरती शामें सुबह के आगमन में बेहतर की संभावना में जीते हम और तुम
माफ़ी से आजादी तक
मैं सबको माफ करता आया कुछ इस तरह मैं खुद की भलाई करता आया ज़िंदगी बाकी है अभी, जीना भी कुछ बाकी हैं
जीवन की खूबसूरती
आजादी से खूबसूरत कुछ नही। जरा आँखों को बंद कर महसूस करे।
यादें
यादें दस्तक देती हैं जाडे़ में नरम धूप की तरह ओस की नमी की तरह हल्की सी ठंडक लिए आँखों में बहते नीर सी खुशियों में लम्बी मुस्कान की तरह