जीवन एक तन्हा सफर था मैं खुद ही मुसाफिर और हमसफ़र किस से इल्तिजा करू थोड़ी देर रुक के मेरी दुनिया रोशन करने की मैं खुद ही रोशनी बना फिर हर तरफ उजाला भी था थोड़ी सी तोहमत लोग लगाते हैं थोड़ी किस्मत भी तो कुछ तोहमत भी थी कुछ ख़ुशी और ख़ामोशी का नजरानाContinue reading “कुछ वक्त के पन्नो से”
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प्रकृति की छाव में
सुबह सुबह उगते सूरज को देख के जो मेरे मन के भाव बदलते हैं ना अल्फ़ाज़ हैं ही नहीं उस खो जाने वाले अनुभव के लिए, उफ्फ उसे तो सिर्फ महसूस किया जा सकता है उसी पल में ठहर के और यकायक जिंदगी खूबसूरत लगने लगती हैं फिर इक बार जी उठने को मन करताContinue reading “प्रकृति की छाव में”
कई रंग हैं जिंदगी के
कभी कभी आप कुछ खो के भी बहुत कुछ पा लेते हैं, जैसे किसी हमसाया को खो के खुद का साथ पा लेना, जैसे अंधेरी रातो से निकल के सूरज की मद्धिम मद्धिम सी रोशनी का नजराना मिल जाना और फिर इक सुबह का बन जाना, जैसे खुद को मुस्कुराता हुआ देख के भीतर इकContinue reading “कई रंग हैं जिंदगी के”
जीवन में कुछ करे
उठिये, जागियेरोये नहींखड़े हो जायेकुछ करेअसफलता से बिना डरेकुछ काम करेव्यर्थ ना करे जीवनक्यूंकि जिंदगी दोबारा नहीं आएगीजीवन को चलाते रहने के लिए ही करेपर कुछ करे बैठे ना रहे, कुछ करेजीवन को सार्थक बनायेकुछ असाधारण करे, एक काम ना करे तो दूसरा करेक्या नहीं मालूम ?एक सच्चा प्रयास ही जीत की नींव हैंपथिक थक जायेContinue reading “जीवन में कुछ करे”
आगरा यात्रा और ताजमहल की याद
इत्तेफाकन जाना हुआ, अब हर एक अन्जाना मोड़ जाना पहचाना हुआ।बेफिक्री से फ़िक्र तक दो बहने हमसाया की तरह साथ….उस अनजाने से शहर में दो अजनबियों से आमना-सामना हुआ वे ‘अमृत’ जैसे रहे हमारी उस यात्रा में…हमारे साथ हमारे दिल में ख़ुशी भी और शुक्रगुज़ार होने का एहसास भी…यादें कुछ खट्टी भी हैं तो मिठासContinue reading “आगरा यात्रा और ताजमहल की याद”
ढलती शाम
आज सांझ फिर विदाई ले रही हैंदो कदम चल केदो कदम ढल रही हैंढलती उम्र सीशाम जा रही हैंबुढ़ापे में आती झुर्रियों सीसवेरे घर से निकलेपंछी भी घर को जारहे हैंमनमर्ज़ी करकेछलांगे लगाफुर्र से उड़ते हुएपहाड़ो की गोद मेंढलता सूरजजैसे माँ की गोद मेंसोता शिशुइत्मीनान से