ज़रा महसूस करोज़िदंगी कोकितनी हसीन हैंखुशनुमा हैंकुछ धूपकुछ छांव सी हैंकभी हल्कीकभी भारीआज और कल में ज़िंदगीप्यारी ज़िंदगी
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बच्चे
बच्चे सबसे ज्यादा प्रेम के हकदार होते हैंवो नही जानते कि छल क्या होता हैं
बिन आवाज
ख़्वाब छन से बिखर जाते हैं बिन आवाज किये यूं ही अचानक किसी भी पल
प्रेम
प्रेम का शुद्ध रुप वो ही जिसे पाया ना जा सका जो आज भी बाकी हैं आपमें
अनकहे जज़्बात
तुम होती हो तो जीवन में ख़ुशी हिम्मत और हंसी की महक हैं जैसे खाने में मसाले की होती होती हैं तुमसे मसखरी, प्यार से लड़ना झगड़ना सब याद हैं मेरी सबसे प्यारी यादों में तुम बसी हो तो मोहब्बत तुमसे भी अगर पैमाना नापा जाये चाहत का तो वो बचपन के गुड्डे- गुड्डियां वोContinue reading “अनकहे जज़्बात”
स्वयं को समर्पित
एक कविता खुद के लिए प्रेम से खुद के मन को स्पर्श करो देखो के तुम जीवंत हो तुम ही जीवन तुम ही मरण तुम्हारे बाद न कुछ तुम्हारे साथ ही सब कुछ तुम्हारी हंसी अमलतास की बेल सी महकते गुलाब सी तुम्हारा होना ज़िन्दगी में खिलखिलाहट जैसा सबसे बेहतरीन तोहफा स्वयं का स्वयं कोContinue reading “स्वयं को समर्पित”
शिकायतें
ना जाने क्यों अनगिनत लोगों को मुझसे अनगिनत शिकायतें हैं और मैं गिला शिकवा भी ना करू शिकायतों की शर्त ये भी हैं
सफ़र
माना कि मुश्किल है डगर पर मुमकिन है सफ़र
शाम कुछ बाकी हैं
अभी शाम कुछ बाकी हैं कुछ चाय पे गुफ़्तगू का वो गुमान वो अंदाज, वो ख़्वाबों ख़्याल का आना भी बाकी हैं अभी इस पराये से शहर का मेरा अपना होना बाकी हैं के शाम अभी काफ़ी हैं
सच
दुनिया का हर प्रेमी स्वयं को सबसे सच्चा प्रतीत होता हैं