देखो इक इक लम्हे में कैसे जीवन जा रहा हैं गुजरता ही जा रहा हैं कभी लौट के ना आने के लिए
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मै खुद सा होना चाहता हूँ
मैं खुद सा रहना चाहता हूँ खुद सा बनना चाहता हूँ हर इक शख्स सुनार सा बन मुझ पे नक्काशी कर अपनी पारखी नजरो में ढालना चाहता हैं, निखारना चाहता हैं ये परेशानी का सबब बनता हैं मैं खुद को ही जीना चाहता हूँ मैं खुद में ही जीना चाहता हूँ
कुछ बाते, कुछ यादें
आज फिर चाँद की हल्की हल्की सी झलक खिड़की से आ रही हैं, होले होले जैसे चाँद का उजियारा लोरी गा रहा हो, कुछ सुना रहा हो रात को रोशन बना रहा हो जैसे , कायनात की खूबसूरती बढ़ा रहा हो जैसे, होले होले से कुछ गुनगुना रहा हो जैसे।
कुछ पल प्रकृति की छांव में
आज चाँद कुछ उजला उजला हैं धीमी धीमी सी हवा दूर कही ठहरे ठहरे से चाँद सितारे कितने खूबसूरत है नजारे
जीवन की सीख
खुद का साथ देना जब कोई साथ ना दे चुनौतीपूर्ण हैं पर सार्थक हैं
एकता
एकता देश की क्षमता को दर्शाती हैं भविष्य का अनुमान भी।
अभी मेरा आना बाकी हैं
अभी मेरा तेरे शहर से कुछ वास्ता बाकी हैं अभी मेरा लौट के घर को आना भी बाकी हैं ख़्वाबो ख्याल का आना जाना भी बाकी हैं जुस्तुजू भी बेहद हैं, इसमें हद आना अभी बाकी हैं मेरे लिए मेरा होना ही काफ़ी हैं के तेरे शहर से मेरा वास्ता अभी बाकी हैं
कुछ यादगार यादें
मैं ख़्वाब सही
खुद का साथ
दुनिया उगते हुये सूरज को ही सलाम करती हैं करेगी पर सूरज को अस्त भी होना होता हैं प्रकृति का नियम हैं फिर नयी सुबह आती हैं, फिर से सूर्योदय होता हैं दुनिया को रोशन करने तो जब कोई ना हो साथ तो खुद को खुद सलाम करे याद रखे के इसके बाद फिर सेContinue reading “खुद का साथ”