ये जो तुम

ये जो तुम हाथ बांधे खडे़ हो किसी याद में खड़े हो या ताक में या ज़िंदगी की लम्बी सी कतार में या जीने की कवायद में या खाली खाली किसी आशियाने की पुरानी दीवार पे लिखे अल्फ़ाज़ में गुम या किसी की भूली बिसरी मीठी याद में बोलो कब तक हैं ये हाथो काContinue reading “ये जो तुम”

मैं ख़्वाब में हूँ

ज़िंदगी की हक़ीक़त धुंधली हैं मैं ख़्वाब में हूँ ये सुहावना सा हैं हक़ीक़त चुभती तीर सी ख़्वाब चांद सी ठंड़क लिए हक़ीक़त धूप सी तपती तेज इसलिए मैं ख़्वाब हो गयी हक़ीक़त कही खो गई

तुम ख़्वाब सी

तुम ख़्वाब सी रात के किसी पहर सी बात के किसी राज सी सुबह की मीठी नींद सी कभी हमसफ़र, कभी हमदर्द सी कभी वजह, कभी बेवजह सी कभी आँखो की नमी सी कभी धूप की तपिश सी कही थोड़ी, कही ज्यादा कुछ मुझमें, कुछ ज़िन्दगी में बसती हों कभी हक़ीक़त, कभी ख़्वाब बन के

प्यारा बचपन

बचपन आज फिर से बहुत याद आ रहा हैं जाने क्यों वो ही मीठी मीठी सी यादेंं वो ही सोंधी सोंधी सी खाने की खुश्बू मन को महसूस सी हो रही हैं फिर से एक लम्बी सी मुस्कान लिए में उन दिनों, उन ख़्वाब जैसे ख़्यालों में डूबी सी जा रही हूँ जैसे मैं छोटीContinue reading “प्यारा बचपन”

अगर मैं कभी कही खो जाऊं

अगर मैं कभी कही खो जाऊं तो, मुझे अल्फाजों में तलाश लेना, मिल जाऊगी मेरे लिखे हर इक लफ्ज़ में “मैं” बसती हूं महसूस कर लेना इस जमीं से आसमां तक के सफ़र में मुझेहवा सी बहती मिल जाऊगी खूशबू की तरह महकती सी इन फिजाओं में घुल जाऊंगी, ढूंढ लेना कहीं मिल जाऊगी, पुरानीContinue reading “अगर मैं कभी कही खो जाऊं”

दोस्ती का लम्बा सफ़र

मेरे अफ़सानो की किताब में इक तेरी भोली भाली सी सूरत का भी असर हैं आज के ही दिन नौ साल पहले शुरू हुआ था ये सफ़र मेरी वो दबी सी आवाज, वो छुपा सा ख्याल तेरा वो सजग कदमो से आना कितना निराला सा था जो आज भी हैं हम दोनों का याराना तूContinue reading “दोस्ती का लम्बा सफ़र”

प्रेम

प्रेम निश्चल, निस्वार्थ प्रेम पर बस नहीं होता वो खोने पाने की संभावनाओं से परे अनुभूति पे टिका है प्रेम आपको मजबूत बनाता हैं, ना के कुछ छीनता हैं विश्वास से होकर गुजरने वाली डोर, रुह तक उतर जाती हैं अगर ये सच्ची हो प्रेम मिलने मिलाने से दूर इक बंधन, जिसे आप खो केContinue reading “प्रेम”

जश्न ए आज़ादी

आज मेरे देश में जश्न ए आज़ादी हैं जवां धड़कनो में आज देश प्रेम की अंगड़ाई हैं आज शहीदों की शहादत को भरपूर नमन यादगार यादे हैं, जो आज ही बहुत याद आई हैं अभी कुछेक को ही याद हैं “भगत सिंह” की विदाई की शहनाईवो “आज़ाद” की कलाई वो भूले बिसरे देश के कुछContinue reading “जश्न ए आज़ादी”

सोचती हूँ के

सोचती हूँ के आज खुद को लिख दूँरात का कोई ख्वाब लिख दूबेबस सी कोई बात लिख दूँआज खुद की तकदीर लिख दूँआज ज़मी आसमाँँ की भूली बिसरि सी याद लिख दूँशामो सुबहो की वो मीठी बात लिख दूँआज मैं खुद का अनचाहा सा वो राग लिख दूँवो साज लिख दूँमेरी बोली की मिठासमेरी आँखोंContinue reading “सोचती हूँ के”

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