मुझे प्रेम में हार मानना मंजूर हैं
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क्षणिक
उम्र क्षण क्षण में बीत जाती हैं बिन एहसास हक़ीक़त से रूबरू करवाता हैं वक्त
खुशनुमा यादें
हंसी ठिठोलियों और खुशनुमा यादों को समेट कर रखना भी जरूरी हैं ना जाने किस पल ज़िंदगी की शाम हो जाये
आजमाइश
ज़िंदगी में आजमाइश ज्यादा हो तो इंसान थक जाता हैं पर आजमाइश ज़िंदगी का हिस्सा हैं
प्रेममय
मैं प्रेम के पथ पे खुद से प्रीत सजन से प्रीति नयन झरे उनकी याद में अधूरे लफ़्ज अधरो पे मैं तुझ बिन अधूरी मैं पिया संग ही पूरी मैं ‘मेरा’ सब प्रेममय पूजूँँ या विनती करू तोहरी प्रिये कहो तुम ही
प्रेम की खूबसूरती
प्रेम को प्रेम सा रहने क्यूं नही दिया जाता जाने कब इसे मान सम्मान का जरिया बना दिया जाता है और इसकी खूबसूरती को खत्म कर दिया जाता है
जोखिम
ज़िंदगी जोखिमों का सफ़र और आसानियाँ भी इसी में तलाश करनी हैं
जीवन का रहस्य
मैंने जीवन का गूढ़ रहस्य समझा हैं मृत्यु और जीवन के बीच में जीना हैं जितना भी जीवन जीना हैं हंसी खुशी से बेहतरी में काम करके सब कुछ यही छोड़ के गुण ग्रहण करके खाली हाथ प्रस्थान करना हैं इक निश्चित समयावधि में
सुधार की संभावना
आज और कल को सुधारा जा सकता हैं, बशर्ते बीते कल को भूला जाए आज में कुछ मुमकिन काम किया जाए उसे बेहतरी से जिया जाए
प्राथमिकता
जीवन में प्रथम प्राथमिकता जहां हो, वहां खुश रहना होना चाहिए फिर विचार करना और काम करना उसपे जहां होना हैं आगे की ज़िंदगी में