माफ़ी से आजादी तक

मैं सबको माफ करता आया कुछ इस तरह मैं खुद की भलाई करता आया ज़िंदगी बाकी है अभी, जीना भी कुछ बाकी हैं

ख्वाब में

मेरे ख्वाबों में तुम रहते हो तुम सोते नही जागते रहते हो परवाने हो शमा को बुझने नही देते हो

ज़िंदगी की चाहते

मैनें प्रेम को कभी पाना नही चाहा बस दिल से चाहा। इसकी खूबसूरती को जिया। खुश हूँ अब खुद के साथ भी किसी के भी साथ खुश रहने का जज़्बा लिये।

स्वछंद प्रेम

प्रेम को ना छीना जाता हैं ना ही तंज कसे जाते हैं उसे जीने दिया जाता हैं “स्वछंद”

कुछ बाते, कुछ यादें

आज फिर चाँद की हल्की हल्की सी झलक खिड़की से आ रही हैं, होले होले जैसे चाँद का उजियारा लोरी गा रहा हो, कुछ सुना रहा हो रात को रोशन बना रहा हो जैसे , कायनात की खूबसूरती बढ़ा रहा हो जैसे, होले होले से कुछ गुनगुना रहा हो जैसे।

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