जीवन में कुछ करे

उठिये, जागियेरोये नहींखड़े हो जायेकुछ करेअसफलता से बिना डरेकुछ काम करेव्यर्थ ना करे जीवनक्यूंकि जिंदगी दोबारा नहीं आएगीजीवन को चलाते रहने के लिए ही करेपर कुछ करे बैठे ना रहे, कुछ करेजीवन को सार्थक बनायेकुछ असाधारण करे, एक काम ना करे तो दूसरा करेक्या नहीं मालूम ?एक सच्चा प्रयास ही  जीत की नींव हैंपथिक थक जायेContinue reading “जीवन में कुछ करे”

ढलती शाम

आज सांझ फिर विदाई ले रही हैंदो कदम चल केदो कदम ढल रही हैंढलती उम्र सीशाम जा रही हैंबुढ़ापे में आती झुर्रियों सीसवेरे घर से निकलेपंछी भी घर को जारहे हैंमनमर्ज़ी करकेछलांगे लगाफुर्र से उड़ते हुएपहाड़ो की गोद मेंढलता सूरजजैसे माँ की गोद मेंसोता शिशुइत्मीनान से

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