इक पल

इक पल जो हाथ से छूट गया लौट के आ ना सकेगा वो जो पीछे छूट गया चलो आगे की सुध लेते हैं आज को मुकम्मल करते हैं आज को कुछ इस तरह से जीते हैं

मन की बाते

हृदय के प्रथम से अन्तिम छोर तक की इक इच्छा हैं मुस्कानें फैलाने की सच्चे मायने में किसी के जीवन में परिवर्तन लाने की, फिर उस खुशी को खुद में ही जी लेने की बिन किसी को बताये, दुनिया से परे

स्वछंद प्रेम

प्रेम को ना छीना जाता हैं ना ही तंज कसे जाते हैं उसे जीने दिया जाता हैं “स्वछंद”

कभी किसी पहर

कभी किसी पहर मैंं सितारो के बीच चमकती सी दिख जाऊं तो आश्चर्य न करे, कई अँधेरी रातों से गुजरा हैं ये सफ़र मेरा कभी मैं कंचन सी चमक, महक किसी लता सी पा जाऊं तो आश्चर्य न करे, आग की तपन सह के निखारा हैं खुद को इस रूप में ढाला हैं खुद को

अभी मेरा आना बाकी हैं

अभी मेरा तेरे शहर से कुछ वास्ता बाकी हैं अभी मेरा लौट के घर को आना भी बाकी हैं ख़्वाबो ख्याल का आना जाना भी बाकी हैं जुस्तुजू भी बेहद हैं, इसमें हद आना अभी बाकी हैं मेरे लिए मेरा होना ही काफ़ी हैं के तेरे शहर से मेरा वास्ता अभी बाकी हैं

खुद का साथ

दुनिया उगते हुये सूरज को ही सलाम करती हैं करेगी पर सूरज को अस्त भी होना होता हैं प्रकृति का नियम हैं फिर नयी सुबह आती हैं, फिर से सूर्योदय होता हैं दुनिया को रोशन करने तो जब कोई ना हो साथ तो खुद को खुद सलाम करे याद रखे के इसके बाद फिर सेContinue reading “खुद का साथ”

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