मैं ख़्वाब में हूँ

ज़िंदगी की हक़ीक़त धुंधली हैं मैं ख़्वाब में हूँ ये सुहावना सा हैं हक़ीक़त चुभती तीर सी ख़्वाब चांद सी ठंड़क लिए हक़ीक़त धूप सी तपती तेज इसलिए मैं ख़्वाब हो गयी हक़ीक़त कही खो गई

सोचती हूँ के

सोचती हूँ के आज खुद को लिख दूँरात का कोई ख्वाब लिख दूबेबस सी कोई बात लिख दूँआज खुद की तकदीर लिख दूँआज ज़मी आसमाँँ की भूली बिसरि सी याद लिख दूँशामो सुबहो की वो मीठी बात लिख दूँआज मैं खुद का अनचाहा सा वो राग लिख दूँवो साज लिख दूँमेरी बोली की मिठासमेरी आँखोंContinue reading “सोचती हूँ के”

कुछ वक्त के पन्नो से

जीवन एक तन्हा सफर था मैं खुद ही मुसाफिर और हमसफ़र किस से इल्तिजा करू थोड़ी देर रुक के मेरी दुनिया रोशन करने की मैं खुद ही रोशनी बना फिर हर तरफ उजाला भी था थोड़ी सी तोहमत लोग लगाते हैं थोड़ी किस्मत भी तो कुछ तोहमत भी थी कुछ ख़ुशी और ख़ामोशी का नजरानाContinue reading “कुछ वक्त के पन्नो से”

प्रकृति की छाव में

सुबह सुबह उगते सूरज को देख के जो मेरे मन के भाव बदलते हैं ना अल्फ़ाज़ हैं ही नहीं उस खो जाने वाले अनुभव के लिए, उफ्फ उसे तो सिर्फ महसूस किया जा सकता है उसी पल में ठहर के और यकायक जिंदगी खूबसूरत लगने लगती हैं फिर इक बार जी उठने को मन करताContinue reading “प्रकृति की छाव में”

कई रंग हैं जिंदगी के

कभी कभी आप कुछ खो के भी बहुत कुछ पा लेते हैं, जैसे किसी हमसाया को खो के खुद का साथ पा लेना, जैसे अंधेरी रातो से निकल के सूरज की मद्धिम मद्धिम सी रोशनी का नजराना मिल जाना और फिर इक सुबह का बन जाना, जैसे खुद को मुस्कुराता हुआ देख के भीतर इकContinue reading “कई रंग हैं जिंदगी के”

Design a site like this with WordPress.com
Get started