तुम ख़्वाब सी

तुम ख़्वाब सी रात के किसी पहर सी बात के किसी राज सी सुबह की मीठी नींद सी कभी हमसफ़र, कभी हमदर्द सी कभी वजह, कभी बेवजह सी कभी आँखो की नमी सी कभी धूप की तपिश सी कही थोड़ी, कही ज्यादा कुछ मुझमें, कुछ ज़िन्दगी में बसती हों कभी हक़ीक़त, कभी ख़्वाब बन के

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