कुछ वक्त के पन्नो से

जीवन एक तन्हा सफर था मैं खुद ही मुसाफिर और हमसफ़र किस से इल्तिजा करू थोड़ी देर रुक के मेरी दुनिया रोशन करने की मैं खुद ही रोशनी बना फिर हर तरफ उजाला भी था थोड़ी सी तोहमत लोग लगाते हैं थोड़ी किस्मत भी तो कुछ तोहमत भी थी कुछ ख़ुशी और ख़ामोशी का नजरानाContinue reading “कुछ वक्त के पन्नो से”

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