दोस्ती का लम्बा सफ़र

मेरे अफ़सानो की किताब में इक तेरी भोली भाली सी सूरत का भी असर हैं आज के ही दिन नौ साल पहले शुरू हुआ था ये सफ़र मेरी वो दबी सी आवाज, वो छुपा सा ख्याल तेरा वो सजग कदमो से आना कितना निराला सा था जो आज भी हैं हम दोनों का याराना तूContinue reading “दोस्ती का लम्बा सफ़र”

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