आज फिर चाँद की हल्की हल्की सी झलक खिड़की से आ रही हैं, होले होले जैसे चाँद का उजियारा लोरी गा रहा हो, कुछ सुना रहा हो रात को रोशन बना रहा हो जैसे , कायनात की खूबसूरती बढ़ा रहा हो जैसे, होले होले से कुछ गुनगुना रहा हो जैसे।
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आज फिर चाँद की हल्की हल्की सी झलक खिड़की से आ रही हैं, होले होले जैसे चाँद का उजियारा लोरी गा रहा हो, कुछ सुना रहा हो रात को रोशन बना रहा हो जैसे , कायनात की खूबसूरती बढ़ा रहा हो जैसे, होले होले से कुछ गुनगुना रहा हो जैसे।