मैं ख़्वाब सही

माना
मैं ख़्वाब सही
पर जज़्बात भी हूँ
इक राज भी
भीनी भीनी
सी दूर से आती कोई
महक
रेत का दरिया
मचलता सा समन्दर
संगीत का राग
किसी छंद की चौपाई
सवेरे की दस्तक
दरख़्त की छांव
वो जिसे किताबों में पढ़ा
जा सके
जिसे किसी धुन पे बुना जा सके वो

Published by Poetess

Writing is love.

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