दिल के लिए कोई मरहम नही सिवाय वक्त के
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क्षणिक
उम्र क्षण क्षण में बीत जाती हैं बिन एहसास हक़ीक़त से रूबरू करवाता हैं वक्त
खुशनुमा यादें
हंसी ठिठोलियों और खुशनुमा यादों को समेट कर रखना भी जरूरी हैं ना जाने किस पल ज़िंदगी की शाम हो जाये
आजमाइश
ज़िंदगी में आजमाइश ज्यादा हो तो इंसान थक जाता हैं पर आजमाइश ज़िंदगी का हिस्सा हैं
प्रेममय
मैं प्रेम के पथ पे खुद से प्रीत सजन से प्रीति नयन झरे उनकी याद में अधूरे लफ़्ज अधरो पे मैं तुझ बिन अधूरी मैं पिया संग ही पूरी मैं ‘मेरा’ सब प्रेममय पूजूँँ या विनती करू तोहरी प्रिये कहो तुम ही
स्वयं की तलाश
कितना गलत है कि हम स्वयं को बाहरी दुनिया में तलाश करते हैं पूर्णता को खोजते हैं जो भीतर ही छिपा हैं खजाना उसकी तलाश बाहर करते हैं
प्रेम की खूबसूरती
प्रेम को प्रेम सा रहने क्यूं नही दिया जाता जाने कब इसे मान सम्मान का जरिया बना दिया जाता है और इसकी खूबसूरती को खत्म कर दिया जाता है
खूबसूरत
हरेक शख्स स्वयं में खूबसूरत होता हैं
संतुष्टि
हम मनुष्यों को प्राकृतिक रुप से असंतुष्ट बनाया गया है संतुष्टि हमारी प्रकृति में नही इसे खोजना व्यर्थ है फिर भी खोज को बनाए रखना है मृत्युपर्यन्त
जोखिम
ज़िंदगी जोखिमों का सफ़र और आसानियाँ भी इसी में तलाश करनी हैं