कितना गलत है कि हम स्वयं को बाहरी दुनिया में तलाश करते हैं पूर्णता को खोजते हैं जो भीतर ही छिपा हैं खजाना उसकी तलाश बाहर करते हैं
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कितना गलत है कि हम स्वयं को बाहरी दुनिया में तलाश करते हैं पूर्णता को खोजते हैं जो भीतर ही छिपा हैं खजाना उसकी तलाश बाहर करते हैं
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