ज़िंदगी में आजमाइश ज्यादा हो तो
इंसान थक जाता हैं
पर आजमाइश ज़िंदगी का हिस्सा हैं

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ज़िंदगी में आजमाइश ज्यादा हो तो
इंसान थक जाता हैं
पर आजमाइश ज़िंदगी का हिस्सा हैं

मैं प्रेम के पथ पे
खुद से प्रीत
सजन से प्रीति
नयन झरे
उनकी याद में
अधूरे लफ़्ज अधरो पे
मैं तुझ बिन अधूरी
मैं पिया संग ही पूरी
मैं ‘मेरा’ सब प्रेममय
पूजूँँ या विनती करू तोहरी
प्रिये
कहो तुम ही
कितना गलत है कि
हम स्वयं को
बाहरी दुनिया में तलाश करते हैं
पूर्णता को खोजते हैं
जो भीतर ही छिपा हैं खजाना
उसकी तलाश बाहर करते हैं

प्रेम को प्रेम सा रहने क्यूं नही दिया जाता
जाने कब इसे मान सम्मान का
जरिया बना दिया जाता है
और इसकी खूबसूरती को खत्म कर दिया जाता है

हरेक शख्स स्वयं में खूबसूरत होता हैं

दिल ए नवाबी बता
आज रजा क्या
रुसवाई की सजा क्या
खत्म होती ख़्वाहिशों का मजा क्या
ये अधूरापन है ज़िंदगी में
वो इश्कपना भी है
वो दर्द का दवा होना भी
आज ख़्वाहिशों का समंदर
शांत सा है
तूफान में कश्ती
डुबो देने का फनकार ये भी है


हम मनुष्यों को
प्राकृतिक रुप से असंतुष्ट बनाया गया है
संतुष्टि हमारी प्रकृति में नही
इसे खोजना व्यर्थ है
फिर भी खोज को बनाए रखना है मृत्युपर्यन्त
ज़िंदगी जोखिमों का सफ़र
और
आसानियाँ भी इसी में तलाश करनी हैं


मैंने जीवन का गूढ़ रहस्य समझा हैं
मृत्यु और जीवन के बीच में जीना हैं
जितना भी जीवन जीना हैं
हंसी खुशी से
बेहतरी में काम करके
सब कुछ यही छोड़ के
गुण ग्रहण करके खाली हाथ प्रस्थान करना हैं
इक निश्चित समयावधि में
आज और कल को सुधारा
जा सकता हैं, बशर्ते
बीते कल को भूला जाए
आज में कुछ मुमकिन काम किया जाए
उसे बेहतरी से जिया जाए

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